बोईसर में मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान को लेकर राजनीति गरमा गई है। शिवसेना पर इस जनकल्याणकारी अभियान को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लग रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा लगाए गए आधिकारिक सूचना फलक को हटाए जाने के बाद यह मामला अब खुले राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है।
13 नवंबर 2025 के शासन निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को बकाया आवासीय संपत्ति कर की वसूली के लिए नागरिकों को विशेष रियायत देने का अधिकार दिया गया था। इसी क्रम में 2 दिसंबर 2025 को बोईसर ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर कुल बकाया संपत्ति कर पर 50 प्रतिशत की छूट देने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। जिले में यह निर्णय सबसे पहले बोईसर ग्राम पंचायत ने लागू किया, जिसे नागरिकों का जबरदस्त समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया।
इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी बोईसर पूर्व और पश्चिम क्षेत्र के सभी करदाताओं तक पहुंचे, इसके लिए ग्राम पंचायत ने रेलवे स्टेशन परिसर सहित प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना फलक लगाए थे। इन फलक पर स्पष्ट शब्दों में उल्लेख किया गया था कि यह सूचना 31 दिसंबर तक प्रदर्शित रहेगी और इस अवधि में कोई भी व्यक्ति या संस्था इन पर अन्य किसी प्रकार की विज्ञापन सामग्री न लगाए।

हालांकि, मंगलवार को बोईसर रेलवे स्टेशन परिसर में ग्राम पंचायत का अधिकृत सूचना फलक हटाकर वहां शिवसेना बोईसर शहर की ओर से नया फलक लगाए जाने का मामला सामने आया। इस फलक पर हाल ही में संपन्न पालघर और दहानू नगर परिषद चुनावों में निर्वाचित नगराध्यक्षों के अभिनंदन संदेश प्रदर्शित किए गए थे। ग्राम पंचायत के सूचना फलक को हटाकर राजनीतिक प्रचार लगाए जाने से नागरिकों में नाराज़गी और आश्चर्य दोनों देखने को मिल रहा है।
इस पूरे प्रकरण को और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि शिवसेना द्वारा लगाए गए फलक में बोईसर के उपसरपंच और कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों के फोटो भी शामिल हैं। इससे यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या ग्राम पंचायत के अधिकृत फलक को हटाने के पीछे इन जनप्रतिनिधियों की मौन सहमति थी।
तारापुर औद्योगिक क्षेत्र के चलते बोईसर रेलवे स्टेशन परिसर हमेशा अत्यंत व्यस्त रहता है। ऐसे में संपत्ति कर पर 50 प्रतिशत छूट की जानकारी देने वाला यह सूचना फलक आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक साबित हो रहा था। 31 दिसंबर से पहले ही इसे हटाए जाने से न केवल शासन के अभियान को ठेस पहुंची है।
भारतीय जनता पार्टी के बोईसर मंडल अध्यक्ष महेंद्र भोणे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“बकाया संपत्ति कर पर 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय सभी करदाताओं तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से ग्राम पंचायत ने सूचना फलक लगाए थे। 31 दिसंबर से पहले इन फलक को हटाकर किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत और निंदनीय है। इस मामले में संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”
इस घटना के बाद बोईसर में प्रशासन की भूमिका और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं आम नागरिक यह मांग कर रहे हैं कि जनहित से जुड़े अभियानों को राजनीति से दूर रखा जाए।





