इंडो-नेपाल कबड्डी में भारत बना चैंपियन, सिरोही के दुर्गेश छीपा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर रचा इतिहास

मुकेश कुमार सोलंकी
भीनमाल : 10वीं इंडो- नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप में भारत ने नेपाल को हराकर स्वर्ण पदक जीता । दुर्गेश छीपा का प्रदर्शन सराहनीय रहा, जिन्होंने टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । 10वीं इंडो-नेपाल कबड्डी चैंपियनशिप में भारतीय कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया । फाइनल मे नेपाल कों 28 के मुकाबले भारत के 35 पॉइंट थे और प्रतियोगिता में विजय पताका फहराई । इस ऐतिहासिक उपलब्धि में राजस्थान के सिरोही जिले के भारजा निवासी दुर्गेश छीपा का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा । दुर्गेश ने अपने बेहतरीन खेल, अनुशासन और जुझारू प्रदर्शन से न केवल टीम को मजबूती दी, बल्कि निर्णायक क्षणों में भारत की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई । दुर्गेश छीपा पिता अरविंद कुमार छीपा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है । सीमित पारिवारिक संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया । गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन दुर्गेश ने अपने लक्ष्य को हमेशा सर्वोपरि रखा । अभ्यास के लिए सीमित सुविधाएं, आर्थिक चुनौतियां और संसाधनों की कमी उनके रास्ते में आईं, परंतु उनका आत्मविश्वास और संकल्प कभी डगमगाया नहीं । मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति का संगम दुर्गेश की सफलता के पीछे निरंतर संघर्ष, कठिन परिश्रम और अटूट देशभक्ति की भावना रही है । उन्होंने बचपन से ही कबड्डी को अपना लक्ष्य बनाया और दिन-रात अभ्यास में जुटे रहे । हर टूर्नामेंट, हर मुकाबला उनके लिए सीखने का अवसर रहा । राष्ट्रीय स्तर पर चयन से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी यात्रा प्रेरणादायी रही है । इंडो-नेपाल चैंपियनशिप में उन्होंने तकनीकी कौशल, फुर्ती और रणनीतिक समझ का बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिससे भारतीय टीम को बढ़त मिली ।

क्षेत्र और देश में खुशी की लहर

भारत की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही सिरोही जिले और भारजा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई । ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और स्थानीय युवाओं ने दुर्गेश की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया । परिवारजनों ने इसे वर्षों की मेहनत का फल बताया और कहा कि दुर्गेश की सफलता ने पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है । स्थानीय जनप्रतिनिधियों और खेल संगठनों ने भी उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।

युवाओं के लिए प्रेरणा

दुर्गेश छीपा की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित साधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं । उनकी उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि सच्ची मेहनत, अनुशासन और मजबूत संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है । दुर्गेश की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, विश्वास और आत्मबल की विजय है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है ।

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