पालघर : सनातन धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक समरसता के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में महाराष्ट्र के पालघर में स्थापित “पालघर पीठ” को देश की प्राचीन एवं प्रतिष्ठित विद्वत संस्था काशी विद्वत परिषद, वाराणसी से आधिकारिक संस्तुति एवं नैतिक मान्यता प्राप्त हुई है।
काशी विद्वत परिषद के माननीय अध्यक्ष प्रो. हरि नारायण तिवारी द्वारा जारी मंगलकामना एवं संस्तुति पत्र में पालघर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एक सुव्यवस्थित, मर्यादित और सर्वस्वीकृत आध्यात्मिक पीठ की स्थापना को समय की आवश्यकता बताया गया है।
संस्तुति पत्र में उल्लेख किया गया है कि पालघर पीठ धर्म, योग, संस्कार, सामाजिक समरसता, संत-सुरक्षा, युवा जागरण तथा मठ-मंदिर संपत्तियों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज को दिशा प्रदान करेगा। परिषद ने विश्वास व्यक्त किया कि पीठाधीश्वर के रूप में प्रतिष्ठापित ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज के मार्गदर्शन में यह पीठ धर्म, शांति, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त केंद्र बनेगा। इस अवसर पर योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने कहा,
“जहाँ कभी अंधकार और भय का वातावरण था, वहीं अब संस्कार, सेवा और समरसता का प्रकाश फैलाना हमारा संकल्प है। पालघर पीठ समाज को जोड़ने और संस्कृति को सशक्त करने का केंद्र बनेगा।”
संस्थान की ओर से काशी विद्वत परिषद एवं अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि यह संस्तुति पालघर पीठ के सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। बताया गया है कि पालघर पीठ आगामी समय में युवा जागरण यात्राएँ, संत परिषद गठन, नशामुक्ति अभियान तथा संस्कार जागरण कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ करने की योजना बना रहा है।






