मुंबई : मरुधरा की पावन धरती से उठी ओरण संरक्षण की पुकार अब व्यापक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जनअभियान का रूप ले रही है। जैसलमेर की ओरण भूमि के संरक्षण को आध्यात्मिक आधार देते हुए पालघर पीठाधीश्वर योगीराज भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज ने “मां मां मां – शांति से क्रांति” का आह्वान किया है। इस मुहिम में मुंबई स्थित श्री हरि नारायण सेवा संस्थान के आयुष पांडेय और गोविंद सिंह भाटी भी सक्रिय रूप से सहभागी बने हैं।
ओरण भूमि को केवल चारागाह नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, आस्था और पर्यावरण की जीवनरेखा माना जाता है। यहां पशुधन को आश्रय, पक्षियों को बसेरा और देवस्थलों को संरक्षण मिलता है। अकाल जैसे कठिन समय में यही भूमि संबल सिद्ध होती है। “टीम ओरण जैसलमेर” द्वारा राज्य सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि जैसलमेर कलेक्टरेट और बीकानेर उपनिवेशन कार्यालय में ओरण से जुड़े 45–50 प्रस्ताव वर्षों से लंबित हैं। इन पर शीघ्र निर्णय हो तो लगभग 3–4 लाख बीघा भूमि संरक्षित की जा सकती है।

ज्ञापन में ओरण भूमि के विधिक दर्जीकरण, दर्जीकरण पूर्ण होने तक नए आवंटन पर रोक तथा रावला, सेऊआ, सोनू, सेरवा, रामगढ़ सहित कई गांवों की ओरण, गोचर, तालाब और देवस्थलों को मूल स्वरूप में सुरक्षित रखने की मांग की गई है। साथ ही सौर और पवन परियोजनाओं के विस्तार से पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर भी चिंता जताई गई है।
संतों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि यह किसी टकराव का आंदोलन नहीं, बल्कि संतुलित विकास और सांस्कृतिक चेतना का आह्वान है—धरती मां, गौ मां और मातृ सम्मान की रक्षा के संकल्प के साथ।






