धर्म रक्षा के संकल्प संग योगीराज का वाराणसी आगमन, काशी में गूंजा सनातन जागरण का संदेश

वाराणसी : सनातन धर्म की रक्षा और उसके पुनर्जागरण के उद्देश्य से अपना जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मर्षि योगीराज श्री भारत भूषण भारतेंदु जी महाराज इन दिनों अपने जन्मस्थान वाराणसी पहुंचे हैं। यहां उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और जन-स्नेह मिलन कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं से संवाद किया।
महाराष्ट्र की राडको फाउंडेशन द्वारा इस यात्रा का सुव्यवस्थित आयोजन किया जा रहा है। संस्था के संस्थापक श्री गोपाल राय ने बताया कि योगीराज का यह अभियान समाज को जोड़ने और सनातन मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
महाराष्ट्र की संत परंपरा से जुड़ी भूमि पालघर, जो वर्ष 2020 में हुए साधु हत्याकांड जैसी हृदयविदारक घटना के कारण चर्चाओं में रही, उसी क्षेत्र को योगीराज ने अपनी कर्मभूमि बनाकर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। लंबे समय से धर्मांतरण और सामाजिक विघटन की चुनौतियों से जूझ रहे इस क्षेत्र में उन्होंने सनातन की ज्योति प्रज्वलित रखने का कार्य किया।
कठिन परिस्थितियों, धमकियों, आश्रम पर हमलों, लूट और आगजनी जैसी घटनाओं के बावजूद उनका संकल्प अडिग रहा। “धर्मो रक्षति रक्षितः” के आदर्श पर चलते हुए उन्होंने सेवा और साधना का मार्ग नहीं छोड़ा।
इसी तप और संघर्ष के परिणामस्वरूप हाल ही में पालघर पीठ की स्थापना की गई, जहां योगीराज को पीठाधीश्वर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। यह पीठ आज सनातन संस्कृति, संस्कार और संगठन का उभरता केंद्र बनती जा रही है।
वाराणसी प्रवास के दौरान योगीराज ने त्रिलोचन महादेव मंदिर के दर्शन भी किए, जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उनका सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
योगीराज का यह प्रवास केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और सनातन चेतना को जागृत करने का संदेश है। उनका जीवन त्याग, तपस्या और संघर्ष के माध्यम से समाज को नई दिशा देने की प्रेरणा देता है।

Share on:

Leave a Comment