पालघर जिले के बोईसर पूर्व स्थित मान ग्रामपंचायत क्षेत्र में विराज प्रोफाइल्स स्टील कंपनी के प्रस्तावित विस्तार प्रकल्प को लेकर विरोध तेज हो गया है। संघर्ष समिति, मान ग्रामपंचायत, स्थानीय ग्रामीणों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों ने जनसुनवाई के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए 4 अप्रैल को कंपनी के खिलाफ भव्य मोर्चा निकालने की घोषणा की है। विराज प्रोफाइल प्राइवेट लिमटेड
कंपनी द्वारा मान और वारंगडे क्षेत्र में स्टेनलेस स्टील उत्पादन क्षमता को 1,95,840 टीपीए से बढ़ाकर 33,76,000 टीपीए करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी हेतु जनसुनवाई प्रस्तावित है। इस संबंध में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा 8 अप्रैल को पालघर के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कंपनी के एसआरएम यूनिट (गट नंबर 27, मान) परिसर में जनसुनवाई आयोजित की जानी है।
इस मुद्दे पर आयोजित पत्रकार परिषद में शिवसेना (शिंदे) के जिला प्रमुख कुंदन संखे, अंजली भावर, समीर मोरे, सचिन लोखंडे, प्रशांत पाटिल, भावेश चुरी, अविनाश पाटिल, डेरल डिमेलो, राहुल पाटिल, नीता काटकर, हेमंत पाटिल, अशोक शिंगाडा, जगन्नाथ वरठा, मोरेश्वर दौडा, जितेंद्र पाटिल, विजय कोलेकर सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
पत्रकारों से बातचीत में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और इसे कंपनी परिसर में आयोजित करना निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। साथ ही, यह भी कहा गया कि वर्ष 2012 की जनसुनवाई के दौरान कंपनी द्वारा मान ग्रामपंचायत को दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए और स्थानीय लोगों को रोजगार भी नहीं मिला।
पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप
विरोध करने वालों लोगों ने कहा कि मान ग्रामपंचायत पेसा कानून के अंतर्गत आती है और प्रस्तावित विस्तार आदिवासी समुदाय को मिले संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। ग्रामसभा में इस मुद्दे पर विशेष बैठक कर सर्वसम्मति से विस्तार और जनसुनवाई के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया है।
प्रदूषण और जल संकट को लेकर आक्रोश
ग्रामीणों ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ा है और भूजल भी दूषित हो गया है, जिसके दुष्परिणाम स्थानीय लोगों को भुगतने पड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ऐसा विकास हमें बिल्कुल स्वीकार नहीं है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। अब 4 अप्रैल को प्रस्तावित मोर्चा और 8 अप्रैल की जनसुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






