पालघर जिले का औद्योगिक केंद्र बोईसर और तारापुर एमआईडीसी को जोड़ने वाला चिल्लार–बोईसर मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में है। सड़क पर गहरे गड्ढों, अधूरे चौड़ीकरण और लगातार जाम के कारण उद्योगों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस विषय को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता आशीष पांडे द्वारा उठाए गए सवालों पर अब महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) ने अपना पक्ष रखा है।

एमआईडीसी के उप अभियंता अविनाश संखे द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि चिल्लार–बोईसर सड़क के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक मंजूरी और निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्य शुरू किया गया था। वर्ष 2021 में सड़क को चार लेन में विकसित करने का काम शुरू हुआ, लेकिन कई स्थानों पर स्थानीय विरोध और अतिक्रमण के कारण परियोजना अधूरी रह गई।
एमआईडीसी के अनुसार, करीब 26.50 किलोमीटर लंबे चौड़ीकरण कार्य में अधिकांश हिस्सों का काम पूरा हो चुका है। हालांकि नागझरी और गुंदले गांव के पास करीब 2.05 किलोमीटर सड़क का काम स्थानीय विरोध के चलते अब भी लंबित है। विभाग का दावा है कि चिल्लार फाटा से बोईसर तक सड़क पर गड्ढों की मरम्मत और पैचवर्क समय-समय पर कराया जा रहा है।
यह सड़क तारापुर औद्योगिक क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाती है। दिनभर सैकड़ों भारी ट्रक, कंटेनर और औद्योगिक वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। खराब सड़क के कारण आए दिन जाम, दुर्घटनाएं और वाहनों को नुकसान होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों को भी रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
यह मार्ग केवल तारापुर एमआईडीसी और बोईसर को ही नहीं जोड़ता, बल्कि देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में शामिल तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र (Tarapur Atomic Power Station) तक पहुंचने का भी प्रमुख संपर्क मार्ग है जो वर्षों से बदहाल है। करोड़ों रुपये की परियोजना के बावजूद चौड़ीकरण पूरा नहीं हो सका, जिससे उद्योगों और आम जनता दोनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने परियोजना में हुई देरी और अधूरे कार्य को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब स्थानीय नागरिकों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि वर्षों से अधर में लटका यह चौड़ीकरण कार्य आखिर कब पूरा होगा और बोईसर को जर्जर सड़क से राहत कब मिलेगी।
एमआईडीसी के जवाब पर भी उठ रहे सवाल
एमआईडीसी ने अपने जवाब में दावा किया है कि केवल करीब 2 किलोमीटर का कार्य भूमि अधिग्रहण और स्थानीय विरोध के कारण लंबित है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। मार्ग का निरीक्षण करने पर कई स्थानों पर चार लेन का स्वरूप अधूरा दिखाई देता है। कहीं डिवाइडर नहीं हैं, कहीं सड़क के किनारे सुरक्षा बॉर्डर अधूरे हैं, तो कई हिस्सों में आवश्यक साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में करोड़ों रुपये की इस परियोजना के पूर्ण होने के एमआईडीसी के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना वर्षों से अधूरी स्थिति में है और केवल कागजी प्रगति दिखाकर मामले को आगे बढ़ाया गया है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
बोईसर–चिल्हार मार्ग वर्षों से बदहाल है। यह सड़क तारापुर एमआईडीसी, देश के पहले परमाणु ऊर्जा केंद्र और हजारों कर्मचारियों की रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाकर परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए ठोस पहल नहीं की। इसी जर्जर मार्ग से रोज गुजरने वाले जनप्रतिनिधि भी लंबे समय तक इस समस्या पर मुखर नजर नहीं आए, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है।






