सीईओ के निर्देशों के बावजूद बोईसर में नहीं सुधरी कचरा व्यवस्था
सरकारी फाइलों में ठोस कचरा प्रबंधन के नियम भले ही पूरी तरह लागू दिखाई दे रहे हों, लेकिन पालघर के बोईसर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर फैले कचरे के ढेर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। स्वच्छता के दावों के बीच खुले में सड़ता कचरा प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
एक ओर प्रशासन स्वच्छता और कचरा पृथक्करण के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर के कई हिस्सों में खुले में पड़े कचरे के ढेर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बयां कर रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।
ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 के तहत घरों, दुकानों, कार्यालयों और संस्थानों में कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा स्थानीय निकायों को कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बावजूद इसके, बोईसर में कई स्थानों पर मिश्रित कचरा खुले में पड़ा दिखाई देता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क किनारे जमा कचरे से दुर्गंध फैल रही है और बरसात के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट और अन्य गंदगी के कारण मच्छरों और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि कचरा पृथक्करण और नियमित सफाई को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों को अपने विकास योजनाओं में ठोस कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए जैविक कचरे से खाद तैयार करने तथा सूखे कचरे के पुनर्चक्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है। साथ ही पुराने कचरा स्थलों को समाप्त करने और स्वच्छता ढांचे को मजबूत बनाने की भी जिम्मेदारी तय की गई है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे ने सभी ग्राम पंचायतों को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद बोईसर में दिखाई दे रही स्थिति ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। अब नागरिकों की मांग है कि नियमों का पालन केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के लिए प्रभावी कार्रवाई भी दिखाई दे।

“ठोस कचरा प्रबंधन नियम केवल सरकारी फाइलों और बैठकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बोईसर में जगह-जगह पड़े कचरे के ढेर यह बता रहे हैं कि नियमों के पालन और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। यदि आज भी कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पर्यावरण प्रदूषण और संक्रामक बीमारियों की समस्या और गंभीर हो सकती है। प्रशासन को जवाबदेही तय करते हुए तत्काल ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि स्वच्छता नागरिकों का अधिकार है और इसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
— सत्यप्रकाश सिंह, संस्थापक, नमो नमो मोर्चा बोईसर






