बोईसर पूर्व में वर्षों से लंबित सड़क, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, गटर और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुए “मेरा गांव–मेरी जवाबदारी” अभियान के बाद ग्राम पंचायत ने पहली बार लिखित रूप में विकास कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने का आश्वासन दिया। सांसद डॉ. हेमंत सावरा की मध्यस्थता के बाद 10 जुलाई का प्रस्तावित जनआंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ये कार्य अब तय समय में पूरे हो सकते हैं, तो वर्षों तक जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों इंतजार करना पड़ा? जनता की नजर अब केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर होने वाले विकास कार्यों पर है।
पालघर: जिले के बोईसर पूर्व में वर्षों से चली आ रही मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं को लेकर शुरू किया गया “मेरा गांव–मेरी जवाबदारी” अभियान आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंचते ही पेयजल, जर्जर सड़कें, स्ट्रीट लाइट, गटर, जलनिकासी और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी समस्याओं से परेशान नागरिकों ने 10 जुलाई को विशाल जनआंदोलन और मोर्चे का ऐलान किया था। लेकिन पालघर के सांसद डॉ. हेमंत सावरा की मध्यस्थता में हुई बैठक के बाद ग्राम पंचायत ने पहली बार लिखित रूप में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना प्रस्तावित मोर्चा स्थगित करने का फैसला किया।

यह आंदोलन पिछले कई दिनों से बोईसर पूर्व में चर्चा का विषय बना हुआ था। “मेरा गांव–मेरी जवाबदारी” अभियान के माध्यम से स्थानीय नागरिक लगातार प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित कर रहे थे। आंदोलन की बढ़ती तीव्रता और जनसमर्थन को देखते हुए सांसद डॉ. हेमंत सावरा ने मामले में हस्तक्षेप किया और ग्राम पंचायत, प्रशासन तथा नागरिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की।
बैठक में नागरिकों की ओर से पेयजल संकट, टूटी हुई सड़कें, अधूरी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, गंदगी, बंद नालियां और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया। सांसद डॉ. हेमंत सावरा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बोईसर पूर्व की सभी लंबित मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने बोईसर ग्राम पंचायत के ग्रामसेवक कमलेश संखे को भी विकास कार्यों में आवश्यक सभी कार्यों को शामिल कर उन्हें तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।

बैठक के बाद बोईसर ग्राम पंचायत की ओर से सरपंच के हस्ताक्षर के साथ विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण जारी किया गया। पत्र में बताया गया कि आंतरिक और मुख्य सड़कों की मरम्मत का कार्य जारी है। कई सड़कों पर कंक्रीटीकरण एवं मरम्मत पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य प्रमुख सड़कों के लिए जिला परिषद और सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भेजे गए हैं।
पेयजल समस्या को लेकर पंचायत ने स्वीकार किया कि बढ़ती आबादी के कारण वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह गई है। इसके समाधान के लिए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के माध्यम से नई जलापूर्ति योजना पर कार्य शुरू किया गया है, जिसके लिए लगभग 40 लाख रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। पंचायत का दावा है कि योजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्राम पंचायत ने यह भी कहा कि नालों की नियमित सफाई, जलनिकासी व्यवस्था में सुधार, स्ट्रीट लाइट की सुविधा और कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि कुछ विकास कार्य बिजली वितरण कंपनी की तकनीकी प्रक्रियाओं तथा अन्य प्रशासनिक कारणों से प्रभावित हुए हैं।
बैठक में भाजपा वरिष्ठ नेता संजय पाटिल, जिला महामंत्री अशोक वडे, अंकुर राऊत, प्रशांत संखे, महेंद्र भोने नागरिकों की ओर से चंदन सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने विकास के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।

सांसद डॉ. हेमंत सावरा के आश्वासन और ग्राम पंचायत द्वारा लिखित स्पष्टीकरण जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों ने विश्वास व्यक्त करते हुए 10 जुलाई को प्रस्तावित मोर्चा फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में विकास कार्य शुरू नहीं हुए या वादे पूरे नहीं किए गए तो भविष्य में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। यदि ग्राम पंचायत अब लिखित रूप में मूलभूत सुविधाओं के विकास और कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का आश्वासन दे रही है, तो आखिर इतने वर्षों तक ये समस्याएं लंबित क्यों रहीं? सड़क, पानी, गटर और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को आंदोलन की चेतावनी देने की नौबत क्यों आई?

स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या जनआंदोलन की घोषणा, ग्रामीणों की एकजुटता और सांसद की मध्यस्थता के बाद ही ग्राम पंचायत सक्रिय हुई? क्या बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक दबाव के कारण पंचायत को लिखित आश्वासन देना पड़ा? हालांकि इसका जवाब आने वाले दिनों में जमीन पर होने वाले विकास कार्य ही देंगे।

फिलहाल बोईसर पूर्व के लोगों ने आंदोलन स्थगित कर प्रशासन और ग्राम पंचायत को एक अवसर दिया है। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से लंबित विकास कार्य वास्तव में कब और कितनी तेजी से पूरे होते हैं। यही इस पूरे अभियान की वास्तविक सफलता और प्रशासन की जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।






