पालघर ; बारिश शुरू होते ही बोईसर और आसपास के क्षेत्रों में महावितरण की बिजली व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि हल्की हो या तेज बारिश होते ही कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। फॉल्ट होने के बाद घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोगों को एक-दो दिन तक अंधेरे में रहना पड़ता है।
लगातार बिजली कटौती से घरेलू कामकाज, व्यापार, विद्यार्थियों की पढ़ाई और छोटे उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है। बरसात के मौसम में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से पेयजल आपूर्ति, सहित अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए महावितरण के स्थानीय कार्यालय और अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर कई बार फोन किया जाता है, लेकिन कई बार कॉल रिसीव नहीं होते। इससे लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायत का जवाब ही नहीं मिलेगा तो समस्या का समाधान कैसे होगा?
बोईसर क्षेत्र में महावितरण ने कई इलाकों मे स्मार्ट मीटर लगाए हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि केवल मीटर स्मार्ट होने से व्यवस्था स्मार्ट नहीं बनती। उनका सवाल है कि जब उपभोक्ताओं से समय पर बिजली बिल वसूला जाता है, तो बारिश के दौरान समय पर बिजली बहाल करने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई देती?
नागरिकों ने मांग की है कि बारिश के मौसम को देखते हुए बिजली लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य उपकरणों का नियमित रखरखाव किया जाए। फॉल्ट होने पर तत्काल मरम्मत दल मौके पर पहुंचे और शिकायत हेल्पलाइन को भी अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी और राहत मिल सके।
बार-बार होने वाली बिजली कटौती और देरी से बहाली के कारण लोगों में महावितरण के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब उपभोक्ताओं की मांग है कि केवल स्मार्ट मीटर लगाने के बजाय बिजली आपूर्ति और शिकायत निवारण व्यवस्था को भी वास्तव में ‘स्मार्ट’ बनाया जाए। इस संबंध में महावितरण का आधिकारिक पक्ष जानने की हमने कोशिश नहीं की क्योंकि विभाग के अधिकारी या तक की लाईन मेन तक की फोन रिसीव नहीं करने की आदत बना चुके है.






