पालघर जिले के जव्हार तहसील के दुर्गम आदिवासी क्षेत्र खडकीपाड़ा गांव में बारिश का मौसम ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी लेकर आता है। गांव के पास नदी पर पक्का पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ जाती है। मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डोली के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। स्कूली बच्चों की भी मजबूरी कम नहीं है। पुल नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को बारिश के मौसम में नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए भी ग्रामीणों को इसी नदी को पार करना पड़ता है। यानी स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नदी ही ग्रामीणों का रास्ता बनी हुई है। ग्रामीणों की शिकायत है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनके गांव तक पक्की सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच पाई है। हर साल बारिश में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बरकरार है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से खडकीपाड़ा गांव में स्थायी पुल और बेहतर सड़क निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में भी विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जरूरी है। विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब शहरों के साथ-साथ दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं सुरक्षित तरीके से उपलब्ध हों।






