नालासोपारा : चश्मा रिटेल कंपनी लेन्सकार्ट में कर्मचारियों को तिलक, टिकली और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक धारण करने से रोके जाने के आरोपों ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे के सामने आते ही नालासोपारा इलाके में सामाजिक और धार्मिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
बताया जा रहा है कि कंपनी से जुड़ी कथित गाइडलाइन को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद मामला गरमाया। कंपनी के सह-संस्थापक पियूष बंसल के नाम के साथ इस मुद्दे को जोड़ा गया, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
इसी के विरोध में नालासोपारा पूर्व स्थित ब्रॉडवे के सामने मार्वल बिल्डिंग में मौजूद लेन्सकार्ट स्टोर पर विश्व हिन्दू महासंघ के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने दुकान में मौजूद कर्मचारियों से बातचीत करते हुए कहा कि वे तिलक या अन्य धार्मिक प्रतीक धारण करने से न घबराएं और अपनी परंपराओं का पालन करें। इस दौरान संगठन की ओर से यह भी चेतावनी दी गई कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े प्रतीकों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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विश्व हिंदू महासंघ मुंबई के प्रभारी प्रदीप मिश्रा विजय ने बताया की विवाद बढ़ने के बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया। Lenskart ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी पुरानी गाइडलाइन पर आधारित है और वर्तमान में ऐसी कोई पाबंदी लागू नहीं है। कंपनी ने इस पूरे मामले पर खेद व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि संशोधित दिशा-निर्देशों में कर्मचारियों को तिलक, बिंदी, सिंदूर और कलावा पहनने की पूरी अनुमति है।
फिलहाल, कंपनी की सफाई के बाद मामला कुछ हद तक शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन इस घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट नीतियों को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।






