मुख्यमंत्री का काफिला भी बदहाल बोईसर- चिल्हार मार्ग से गुजरा, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, या फिर जनता की परेशानी उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है? स्थानीय नेताओं द्वारा स्वागत के पोस्टर लगाने और विकास के दावे करने से सड़कें नहीं सुधरतीं। इसके लिए जमीन पर काम करना पड़ता है और जवाबदेही स्वीकार करनी पड़ती है।
बोईसर :मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर हाइवे से लेकर बोईसर-चिल्हार मार्ग पर जगह-जगह स्वागत के पोस्टर और बैनर लगाए गए, लेकिन इसी मार्ग की बदहाल स्थिति ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया। टूटी-फूटी सड़क और जगह-जगह बने गड्ढों के बीच से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरा, मगर सड़क की दुर्दशा ने क्षेत्र के बुनियादी विकास कार्यों की हकीकत सामने ला दी।
अकाल से प्रभावित राज्य के मुख्यमंत्री के स्वागत में पोस्टरों और बैनरों के जरिए स्थानीय नेताओं ने उत्साह और अपना नाम चमकाने की कोशिश की गई, लेकिन सड़क की हालत देखकर स्थानीय नागरिकों के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कई वर्षो से बदहाल इस महत्वपूर्ण मार्ग के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि और नेता कब सामने आएंगे और सड़क मरम्मत कब होगी? बोईसर ओधोगिक क्षेत्र,तारापुर परमाणु घर के चलते रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों और यात्रियों को गड्ढों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब तक इस मार्ग मे कई लोग हादसों से अपनी जान गवा चुके है. अब भी खराब सड़क से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान सड़क की बदहाली पर अब सवाल उठ रहे हैं। क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर ध्यान देंगे, या फिर स्वागत के पोस्टरों के बीच सड़क की दुर्दशा यूं ही नजरअंदाज होती रहेगी? बोईसर-चिल्हार मार्ग के नागरिक अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क की ठोस मरम्मत और सुरक्षित आवागमन की उम्मीद कर रहे हैं।
बदहाल बोईसर-चिल्हार मार्ग पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और नेताओं की चुप्पी क्यों?
बोईसर-चिल्हार मार्ग की बदहाली अब प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गई है। वर्षों से अधूरा पड़ा यह मार्ग गड्ढों और जर्जर हालत के कारण वाहन चालकों के लिए मुसीबत बना हुआ है। जनता रोजाना परेशानी झेल रही है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नेताओं और संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही। मुख्यमंत्री का काफिला भी इसी बदहाल मार्ग से गुजरा, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, या फिर जनता की परेशानी उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है? स्वागत के पोस्टर लगाने और विकास के दावे करने से सड़कें नहीं सुधरतीं। इसके लिए जमीन पर काम करना पड़ता है और जवाबदेही स्वीकार करनी पड़ती है।
महाराष्ट्र के पांच शीर्ष जिलों में शामिल होगा पालघर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पालघर जिले मे शुक्रवार को दोहराया कि पालघर जिला राज्य के शीर्ष पांच जिलों में शुमार होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियों, किसानों, खेत मजदूरों और महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़े बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट किया कि सरकार के लिए परियोजनाओं से अधिक महत्वपूर्ण स्थानीय लोगों का हित है। विकास का लाभ भूमि-पुत्रों तक पहुंचना चाहिए और उनकी समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर सुलझाई जानी चाहिए। हनुमान नगर में सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह बात कही।






